Saytzeff Rule in hindi with example | Zaitsev Rule

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सैटज़ेफ नियम एक रूसी वैज्ञानिक ए० एन० जैतसेव (A.N.Zaitsev)(१८४१-१९१०) ने दिया था, जिनके नाम को सैटज़ेफ, सेटजेव,Saytzev, Saytzeff आदि से भी जाना जाता है, को इस तरह परिभाषित कर सकते हैं – ” जब भी कोई विलोपन की अभिक्रिया होती है और यदि उसमे दो प्रकार के उत्पाद (एल्कीन) बनने की संभावनाएं होती हैं तो उत्पाद में वही एल्कीन बनती है जो अधिक प्रतिस्थापित होती है अर्थात अधिक स्थायी होती है |
[ नोट -विलोपन अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं विहाइड़्रोहैलोजनीकरण तथा निर्जलीकरण | इन दोनों में ही उत्पाद बनने के दौरान सैट्जेफ नियम का पालन होता है | एल्कीन का स्थायी होना उसमें अतिसंयुग्मन के कारण होता है ]

कार्बनिक रसायन में जब भी कोई विलोपन की अभिक्रिया होती है तो जो उत्पाद बनता है वो सैटज़ेफ नियम के अनुसार ही बनता है | विलोपन अभिक्रिया में दो सिग्मा बन्ध टूटते हैं और एक पाई बन्ध बनता है | इसे अभी हम नीचे उदाहरण के माध्यम से समझेंगे | दोनों सिग्मा बन्ध दो पड़ोसी कार्बन पर के होते हैं ,जिससे दोनों कार्बन अपनी संयोजकता पूर्ण करने के लिए आपस में एक पाई बन्ध बना लेते हैं |

ऊपर के चित्र में पहले उदाहरण में केवल एक उत्पाद बन सकता है इसलिए इस विलोपन में सैटज़ेफ नियम की आवश्यकता नहीं है, जबकि दूसरे उदाहरण में दो उत्पाद संभावित हैं, परन्तु दोनो का स्थायित्व समान नहीं है | इसलिए दोनो में से कोई एक ही उत्पाद मुख्य उत्पाद होगा और ये निर्धारण सैटज़ेफ नियम करता है | कौन सी एल्कीन अधिक स्थायी होगी इसे आगे समझते हैं |

जिन दो कार्बन परमाणुओं के बीच पाई बन्ध बनता है, उन पर यदि दो -दो H परमाणु लगे होते हैं तो ऐसी एल्कीन को अप्रतिस्थापित एल्कीन कहते हैं अर्थात उसके सभी चारो H परमाणु किसी अन्य परमाणु या समूह द्वारा प्रतिस्थापित नहीं होते | परन्तु यदि यही H परमाणु किसी मेथिल या एल्किल समूह द्वारा विस्थापित कर दिए जाते हैं तो अब एल्कीन को प्रतिस्थापित एल्कीन कहते हैं | अधिकतम प्रतिस्थापित एल्कीन वही होती है जिसके युग्मबंधित कार्बन के सभी हाइड्रोजन परमाणु किसी अन्य परमाणु या समूह द्वारा हटा दिए गए हो |

ऊपर के उदाहरण दो में पहला उत्पाद ब्यूट-२-ईन में दो हाइड्रोजन प्रतिस्थापित है जबकि ब्यूट-1-ईन में केवल १ हाइड्रोजन प्रतिस्थापित है अतः ब्यूट-२-ईन अधिक स्थायी है और यह मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है |

उदाहरण तीन में २-ब्रोमो-२-मेथिल ब्यूटेन का विहाइड़्रोहैलोजनीकरण हो रहा है | यह अभिक्रिया अल्कोहलिक KOH की उपस्थिति में होती है | इसमें दो तरह के उत्पाद बनने की संभावना होती है परन्तु अधिक स्थाई उत्पाद को प्राथमिकता मिलती है और यह मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है | इस अभिक्रिया में उत्पाद के बनने में सैटज़ेफ़ नियम का पालन होता है |

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