Deacon process : know easily : डीकन विधि method for exams

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सिद्धान्त : – डीकन विधि (deacon method) से क्लोरीन का निर्माण करने में HCI का ऑक्सीकरण CuCl2 (क्यूप्रिक क्लोराइड -उत्प्रेरक) की उपस्थिति में वायु की ऑक्सीजन द्वारा 450oC पर निम्न प्रकार किया जाता है-

4HCl + O2 ———– > 2H2O + 2Cl2

उत्प्रेरक निम्न प्रकार से अभिक्रिया को उत्प्रेरित करता है-

2CuCl2 ——- > Cu2Cl2 +Cl2

2CuCl2 + O2 ——— > 2Cu2OCl2 or 2[CuO.CuCl2]

2HCl + Cu2OCl2 ———-> 2CuCl2 + H2O

Deacon Process to manufacture Chlorine gas

विधि :-

ऑक्सीकरण कक्ष :- ऑक्सीकरण कक्ष में HCl तथा वायु (O2) को 4:1 केअनुपात में प्रवाहित करते हैं | यहाँ पर उत्प्रेरक की उपस्थिति में HCl तथा O2 मिलकर अभिक्रिया करते हैं और क्लोरीन (Cl2)तथा जल (H2O)बनता है |ऑक्सीकरण कक्ष या उत्प्रेरक कक्ष में झावाँ पत्थर क्यूप्रिक क्लोराइड (CuCl2)के विलयन में भीगे हुए रखे रहते हैं तथा कक्ष का ताप 450oCहोता है

4HCl + O2 ———– > 2H2O + 2Cl2

गर्म वायु का जैकेट :- ऑक्सीकरण  कक्ष का ताप बनाये रखने के लिए उसके चारो ओर गर्म वायु का एक जैकेट लगा रहता है | अभिक्रिया के उपरांत यहाँ पर बनने वाली क्लोरीन(Cl2) गैस में तथा जलवाष्प (H2O) की अशुद्धियाँ होती हैं |

कूलर :- इस गैसीय मिश्रण (Cl2 ,N2 ,O2 तथा HCl) को कूलर में ले जाकर ठंडा करके तब धावन कक्ष (washing tower) में ले जाते हैं |

धावन कक्ष (washing tower) :- यहाँ पर ऊपर से जल गिरता रहता है जो HCl को अपने साथ घोलकर नीचे ले जाता है जिससे HCl की अशुद्धि दूर हो जाती है |उसके बाद गैसीय मिश्रण को अवशोषण कक्ष (Absorption Tower) में ले जाते हैं|

अवशोषण कक्ष (Absorption Tower) :-यहाँ पर ऊपर से सान्द्र H2SO4गिरता रहता है जो नमी H2O को अवशोषित कर लेता है |इस प्रकार शुष्क क्लोरीन गैस (Cl2) अवशोषण कक्ष से बाहर निकलती है जिसमे N2 तथा O2 गैसें भी मिश्रित होती हैं |

Note :- इस विधि से शुद्ध क्लोरीन गैस नहीं प्राप्त होती है|

क्लोरीन गैस की प्रमुख रासायनिक अभिक्रियाएं

[1] ऑक्सीजन के साथ : क्लोरीन गैस ऑक्सीजन के साथ नहीं जलती है अर्थात अज्वलनशील है परन्तु जलती हुयी मोमबत्ती इसके जार में ले जाने पर वह बुझती नहीं है |


[2] P , S , As तथा Sb के साथ अभिक्रिया : ये सभी तत्त्व क्लोरीन गैस से अभिक्रिया करके जलने लगते हैं और अपने क्लोराइड में परिवर्तित हो जाते हैं |
सफ़ेद फॉस्फोरस क्लोरीन के जार में स्वतः जलने लगता है |

2P + 5Cl2 ———- > 2PCl5

2S + Cl2 ———— > S2Cl2

2As + 3Cl2 ——- > 2AsCl3

2 Sb + 3Cl2 ——- > 2 SbCl3


[3] H2 , O2 तथा N2 से अभिक्रिया : सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन की हाइड्रोजन से अभिक्रिया बहुत विस्फोटक होती है |अँधेरे में यह अभिक्रिया नहीं होती | ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन गैस क्लोरीन से अभिक्रिया नहीं करती |

H2 + Cl2 ———— > 2HCl (विस्फोट)


[4] धातुओं से अभिक्रिया : क्लोरीन धातुओं से अभिक्रिया करके धातु क्लोराइड बनाती है |

2Na + Cl2 ———— >2NaCl

Mg + Cl2 ———— >MgCl2

Zn + Cl2 ———— >ZnCl2

Cu + Cl2 ———— >CuCl2

2Al + 3Cl2 ———— > Al2Cl6


[5] जल के साथ अभिक्रिया : जल में घुलने पर क्लोरीन गैस हरा पीला विलयन बनाती है जिसे क्लोरीन जल कहते हैं | इस जलीय विलयन में हाइपो क्लोरस अम्ल (HClO) बनता है जो अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन [O] मुक्त करता है|

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HClO———— > HCl + [O]


[6] कार्बन मोनो ऑक्साइड से अभिक्रिया : से अभिक्रिया करके एक विषैली गैस बनाती है जिसे फॉस्जीन (COCl2) कहते हैं |

CO + Cl2 ———— >COCl2


[7] कास्टिक क्षारों से अभिक्रिया :

ठंडे तथा तनु कास्टिक सोडा (NaOH)से अभिक्रिया

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HCl + NaOH ———— > NaCl + H2O

HClO + NaOH ———— > NaClO + H2O

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Cl2 + 2NaOH ———— > NaCl + NaClO + H2O

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गर्म और सांद्र कास्टिक सोडा (NaOH) से अभिक्रिया

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HCl + NaOH ———— > NaCl + H2O

HClO + NaOH ———— > NaClO + H2O

3NaClO ————- > NaClO3 + 2NaCl

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3Cl2 + 6NaOH ———— > 5NaCl + NaClO + 3H2O

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KOH के साथ अभिक्रिया उसी प्रकार होती है जैसे NaOH के साथ

ठंडे तथा तनु कास्टिक पोटाश ( KOH)से अभिक्रिया

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HCl + KOH ———— > KCl + H2O

HClO + KOH ———— > KClO + H2O

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Cl2 + 2KOH ———— > KCl + KClO + H2O

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गर्म और सांद्र कास्टिक पोटाश ( KOH)
से अभिक्रिया

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HCl + KOH ———— > KCl + H2O

HClO + KOH ———— > KClO + H2O

3KClO ————- > KClO3 + 2KCl

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3Cl2 + 6KOH ———— > 5KCl + KClO + 3H2O

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[8] चूने के पानी से अभिक्रिया

ठन्डे चूने के पानी से अभिक्रिया– Calcium chloride (CaCl2) तथा Calcium hypochlorite (Ca(ClO)2) बनता है

2Ca(OH)2+ 2Cl2 ———— >CaCl2 + Ca(ClO)2 + 2H2O

गर्म तथा सांद्र चूने के पानी से अभिक्रिया– Calcium chloride (CaCl2)तथा Calcium chlorate (Ca(ClO3)2) बनता है|

6Ca(OH)2+ 6Cl2 ———— > 5CaCl2 + Ca(ClO3)2 + 6H2O


[9] शुष्क तथा बुझे चूने से अभिक्रिया क्लोरीन गैस शुष्क तथा बुझे चूने से अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण (CaOCl2) बनाती है |

Ca(OH)2 + Cl2 ———— > CaOCl2 + H2O


[10] ऑक्सीकारक गुण क्लोरीन एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो फ्लोरीन से तो कम प्रबल परन्तु ब्रोमीन तथा आयोडीन से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है | यह बहुत से पदार्थो को ऑक्सीकृत

करती है |

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HClO———— > HCl + [O]

Example : सल्फर डाइऑक्साइड के जलीय विलयन को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत करती है |

H2O + Cl2 ———— > HCl + HClO

HClO———— > HCl + [O]

SO2 + [O] ———— > SO3

SO3 + H2O ———–> H2SO4

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SO2 + 2H2O + 2Cl2———-> H2SO4 +2HCl

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